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मुंबई: सोना-चांदी धड़ाम, रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर; वैश्विक तनाव से भारतीय बाजार में हड़कंप

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MCX पर कीमती धातुओं में 6% तक गिरावट, डॉलर के मुकाबले रुपया 93.84 पर; शेयर बाजार में भी तेज गिरावट

मुंबई: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी अस्थिरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय वित्तीय बाजारों पर साफ तौर पर देखने को मिला। हफ्ते की शुरुआत ही भारी उतार-चढ़ाव के साथ हुई, जहां एक ओर कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर भारतीय मुद्रा भी दबाव में आकर ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई। इस घटनाक्रम ने निवेशकों और कारोबारियों के बीच चिंता का माहौल पैदा कर दिया है।

सबसे ज्यादा असर सर्राफा बाजार में देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों के दामों में एक साथ बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोने के अप्रैल वायदा में तेज गिरावट देखने को मिली। सुबह के सत्र में ही सोना करीब 5.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया, जिससे इसकी कीमतों में हजारों रुपये की गिरावट आ गई और यह करीब 1.36 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर के आसपास पहुंच गया।

चांदी की कीमतों में गिरावट और भी ज्यादा गहरी रही। बाजार खुलते ही इसमें तेज बिकवाली देखी गई, जिससे कीमतों में 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। चांदी का भाव गिरकर करीब 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच गया। यह गिरावट हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है, जिसने सर्राफा कारोबारियों को भी चौंका दिया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख भी कमजोर बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है और यह कई कारोबारी सत्रों से दबाव में बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का रुझान बदल रहा है, जिसका सीधा असर सोने-चांदी जैसी धातुओं पर पड़ रहा है।

मुद्रा बाजार में भी स्थिति चिंताजनक रही। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सोमवार को शुरुआती कारोबार में ही रुपया 93.84 प्रति डॉलर के स्तर तक गिर गया, जो इसकी ऐतिहासिक कमजोरी को दर्शाता है। रुपये में इस गिरावट के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं, जिनमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पूंजी निकालना प्रमुख हैं।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। Brent Crude का दाम 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि WTI Crude भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में उछाल सीधे तौर पर रुपये पर दबाव डालता है।

विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी, वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता को बढ़ा रही है। इस स्थिति में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बना रहे हैं और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि आमतौर पर ऐसे समय में सोने की मांग बढ़ती है, लेकिन इस बार डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि के कारण स्थिति उलट गई है।

शेयर बाजार भी इस दबाव से अछूता नहीं रहा। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी शुरुआती कारोबार में ही करीब 2 प्रतिशत तक गिर गए। बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकालना भी इस गिरावट का एक बड़ा कारण है। जब विदेशी निवेशक किसी बाजार से पैसा निकालते हैं, तो वहां की मुद्रा और शेयर बाजार दोनों पर दबाव बढ़ता है। यही स्थिति फिलहाल भारतीय बाजार में देखने को मिल रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने निवेशकों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। एक ओर सोना-चांदी में गिरावट ने सुरक्षित निवेश के विकल्प को कमजोर किया है, वहीं शेयर बाजार की गिरावट और रुपये की कमजोरी ने जोखिम को और बढ़ा दिया है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता है, तो भारतीय बाजारों पर दबाव जारी रह सकता है।

फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और बाजार के रुझानों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। यह दौर अस्थिरता का है, जहां छोटी-छोटी वैश्विक घटनाएं भी बड़े आर्थिक असर डाल सकती हैं। भारतीय वित्तीय बाजार इस समय उसी अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां हर दिन नए उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं।


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